विज्ञान को संमझा तो विज्ञान नही समझे तो जादू।
शाजापुर। शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय शाजापुर में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर विद्यार्थियों में किताबी ज्ञान के स्थान पर असली प्रायोगिक विज्ञान के महत्व को समझाने और बच्चों में वैज्ञानिक जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के सहयोग से राष्ट्रीय विज्ञान दिवस का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का प्रारंभ मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर किया गया कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पूर्व प्राचार्य श्री प्रवीण कुमार मंडलोई थे, विशिष्ट अतिथि के रुप मे रिसोर्स सहायक विज्ञान अधिकारी ओम प्रकाश पाटीदार तथा शैलेन्द्र कसेरा उपस्थित थे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था प्राचार्य श्री हेमेंद्र यादव ने की इस अवसर पर कार्यक्रम में विद्यालय से श्रीमती विजया सक्सेना, श्रीमती ज्योति धाकड़, श्रीमती कविता हाडा, श्रीमती अपेक्षा मंडावत तथा श्री सुयश तोमर मंचासीन थे।
कार्यक्रम के इस दौरान निबंध लेखन, चित्रकला, मैजिकल स्टेम वर्कशॉप का आयोजन किया गया। इस वर्कशॉप में बाच्चो ने अपने हाथों से प्रयोग करके विज्ञान और गणित के सिद्धांतो को रोचक एवं तरीके से संमझने के लिए अपने आसपास के बेकार सामान प्लास्टिक की नली, प्लास्टिक के डिस्पोजल गिलास, पानी की खाली बोतल और गुब्बारों के द्वारा स्कूलों में पढ़ाये जाने वाले जटिल भौतिक विज्ञान के सिद्धान्तों को सरल प्रयोगों के द्वारा विद्यार्थियों के समक्ष के द्वारा जादू के रूप में कर के समझाया गया। इस दौरान बच्चों में बचपन से व्याप्त मिथकों जैसे पेंसिल के छिलकों से रबर बनना , लांघ जाने पर लंबाई रूक जाना , सिर टकराने पर दुबारा टकराना आदि जैसे अंधविश्वासो को दूर करने तर्क आधारित वैज्ञानिक सोच अपनाने के लिए विज्ञान आधारित जादू द्वारा प्रेरित भी किया।
इस अवसर पर सहायक जिला विज्ञान अधिकारी ओम प्रकाश पाटीदार ने बताया कि हमने विज्ञान को किताबो की सीमाओं में बांध दिया है। जिससे न केवल बच्चों की जिज्ञासा समाप्त होती जा रही है बल्कि इस प्रकार का प्रयोग रहित विज्ञान बच्चों पर मानसिक बोझ बनता जा रहा है इसी मानसिक बोझ को रोचकता और जिज्ञासा में बदलने के लिए राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
इस कार्यक्रम का संचालन कार्यक्रम समन्वयक ज्योति रिणवा द्वारा किया गया, आभार रविकांत त्रिपाठी ने माना।
